मिनरल व्यवसायियों को ट्राजिंट पास सम्बन्धी समस्याओं के निराकरण हेतु यूसीसीआई द्वारा निदेषक, खान एवं भू-विज्ञान विभाग को प्रतिवेदन

उदयपुर, 17 फरवरी, 2021। उदयपुर चेम्बर आॅफ काॅमर्स एण्ड इण्डस्ट्री द्वारा यूसीसीआई भवन में माईनिंग सम्बन्धी मुद्दों पर परिचर्चात्मक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में यूसीसीआई के संरक्षक श्री अरविन्द सिंघल, यूसीसीआई की माईनिंग सब कमेटी के चेयरमैन पूर्वाध्यक्ष श्री एम.एल. लूणावत, यूसीसीआई के उपाध्यक्ष श्री विजय गोधा एवं मिनरल प्रोसेसिंग व्यवसाय से जुडे अरविन्द अग्रवाल, श्री प्रकाषचन्द्र जैन आदि उद्यमियों ने भाग लिया।

इस बैठक में चर्चा के अनुसार मिनरल प्रोसेसिंग व्यवसाय से जुडे उद्यमियों को पेष आ रही परेषानियों पर चर्चा की गई तथा इनके निराकरण के लिए उदयपुर चेम्बर आॅफ काॅमर्स एण्ड इण्डस्ट्री के अध्यक्ष श्री कोमल कोठारी द्वारा निदेषक, खान एवं भू-विज्ञान विभाग को एक प्रतिवेदन प्रेशित कर मिनरल प्रोसेसिंग उद्यमियों को ट्रांजिट पास व्यवस्था (टी.पी.) के कारण आ रही परेषानियों / दिक्कतों से अवगत कराते हुए निराकरण का सुझाव दिया गया है।

यूसीसीआई के अध्यक्ष श्री कोमल कोठारी ने प्रतिवेदन में निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:

 वेस्ट मार्बल पाउडर से सम्बन्धित समस्याएं:-

वेस्ट मार्बल क्रेजी पाउडर का परिवहन करने के लिए माईनिंग विभाग के आॅनलाईन सिस्टम में तकनिकी कारण से ट्रांजिट पास (टी.पी.) जारी किए जाने की व्यवस्था नहीं है। इस तथ्य से भली-भांति अवगत होने के बावजूद डूंगरपुर एम.ई. द्वारा केवल उदयपुर से परिवहन किए जाने वाले वेस्ट मार्बल क्रेजी पाउडर पर अवैध चालान बनाया जा रहा है।

जबकि वेस्ट मार्बल क्रेजी पाउडर एक राॅयल्टी पेड मेटीरियल का अपषिश्ट है। यह मार्बल गैंग-साॅ फैक्ट्री से अपषिश्ट के तौर पर निकलने वाला वेस्ट है जिसेे फेंक दिया जाता है। यह वेस्ट पाउडर ट्रांसपोर्टर द्वारा मिनरल फैक्ट्री तक परिवहन कर लाया जाता है तथा ट्रांसपोर्ट बिल के साथ दिया जाता है जिसका फैक्ट्री मालिक द्वारा आरसीएम के तहत जीएसटी अदा किया जाता है।

इस वेस्ट को प्रोसेस करके पाउडर बनाया जाता है जिसका जीएसटी बिल और ई-वे बिल के द्वारा विक्रय किया जाता है। इसका इनपुट ट्रांजिट पास (टी.पी.) नहीं जारी कर सकने की वजह से आउटपुट टी.पी. भी नहीं जारी की जा सकती है।
यह भी ज्ञात है कि मार्बल वेस्ट के मूल खनिज अर्थात मार्बल स्लैब एवं टाईल्स पर भी टी.पी. की व्यवस्था लागू नहीं है।

इसके अलावा हमारे सदस्यों ने बताया कि मार्बल वेस्ट पाउडर और मार्बल पाउडर को अलग-अलग परिभाशित नहीं किया है और इसका फायदा उठाते हुए माईनिंग विभाग के डूंगरपुर एम.ई. द्वारा अवैध परिवहन के चालान की आड में अवैध वसूली का अवसर लेकर गैर कानूनी गतिविधियां हो रही हैं।

ज्ञात हो कि पिछली सरकार द्वारा मार्बल वेस्ट पाउडर को वेट से मुक्त रखा गया था। वर्तमान में भी राज्य में कहीं पर भी वेस्ट मार्बल पाउडर की धर्मकांटे द्वारा टीपी नहीं जारी होती है।
मार्बल क्रेजी का खनन नहीं होता है और यह मार्बल प्रोसेसिंग फैक्ट्री द्वारा ब्लाॅक्स से उत्पादित मुख्य उत्पाद स्लैब्स एवं टाईल्स का अपषिश्ट है। अतः इस पर भी माईनिंग विभाग द्वारा राॅयल्टी का प्रावधान नहीं हो सकता है।

माईन्स से उत्खनन द्वारा निकलने वाले मार्बल ब्लाॅक्स, सोपस्टोन, लफर, खण्डे आदि सभी खनिजों पर माईनिंग विभाग द्वारा राॅयल्टी वसूल की जाती है। इन खनिजों के परिवहन के दौरान माईनिंग विभाग का राॅयल्टी का रवन्ना साथ में होना आवष्यक है।

खनिज के परिवहन के दौरान राॅयल्टी का रवन्ना साथ नहीं होने पर माईनिंग विभाग द्वारा इसे अवैध खनन व राॅयल्टी की चोरी का मामला मानते हुए पेनल्टी लगाई जाती है।

अवैध माईनिंग गतिविधियों पर पूर्णतया रोक लगाने के लिए यूसीसीआई का यह सुझाव है कि माईनिंग विभाग द्वारा राॅयल्टी की वसूली करने वाले ठेकेदार को पाबन्द किया जाए।

यूसीसीआई का यह भी सुझाव है कि माईनिंग विभाग द्वारा मार्बल वेस्ट पाउडर के जो अवैध परिवहन के चालान बनाए गए हैं, जिसके साथ पक्का जीएसटी बिल तथा ई-वे बिल भी था, उन पीडित व्यापारियों को पुनः भुगतान किया जाए।

सोपस्टोन, डोलोमाईट एवं अन्य मिनरल्स से सम्बन्धित समस्याएं:

(1) ट्रांजिट पास (टी.पी.) कनफर्म कराने की अनिवार्यता:

ज्ञात हो कि मिनरल पाउडर की गाडी भरने के बाद माईनिंग विभाग की वेबसाईट से ओटीपी जनरेट की जाती है। ओटीपी जनरेषन के दो घण्टे के भीतर उक्त ट्रक को धर्म कांटें पर जाकर वजन कन्फर्म करने के पष्चात ही टीपी निकलती है।

इस टीपी को कन्फर्म कराने में व्यापारी का बहुत समय व्यर्थ होता है तथा ट्रांसपोर्ट मालिक से कई बार विवाद उत्पन्न हो जाता है क्योंकि ट्रक को दो-तीन बार कांटे पर जाना पड जाता है। प्रायः खाली गाडी का वजन उसके रजिस्ट्रेषन सर्टीफिकेट (आर.सी.) में लिखित वजन से मिलान नहीं हो पाता है क्योंकि वाहन की बाॅडी के माॅडीफिकेषन / आॅल्ट्रेषन से गाडी का वास्तविक वजन में लगभग एक से तीन टन तक का अन्तर रहता है।

खान विभाग द्वारा मिनरल का ट्रांसपोर्ट में प्रयुक्त होने वाले वाहन बाबत खाली गाडी के वजन परिवहन विभाग की वेबसाईट से लिया जा रहा है।

इसका खामियाजा सम्बन्धित खान मालिक और मिनरल प्रोसेसिंग करने वाली औद्योगिक इकाई को भुगतना पड रहा है।

यूसीसीआई का यह सुझाव है कि ट्रांजिट पास (टी.पी.) कनफर्म कराने हेतु ट्रक को धर्म कांटें पर ले जाकर वजन कन्फर्म कराने की अनिवार्यता समाप्त की जाए तथा जिस प्रकार जीएसटी एक्ट में ई-वे बिल जनरेट होता है तथा वह मान्य है उसी प्रकार से टीपी भी सीधे कन्फर्म मानी जावें ताकि समय व श्रम की बर्बादी ना हो।

(2) टीपी में किसी प्रकार की त्रुटि सुधार की व्यवस्था नहीं होना:

टीपी जनरेट करते समय सिस्टम में गाडी नम्बर या वजन गलत फीड हो जाने या अन्य किसी भी प्रकार की गलत एन्ट्री हो जाने पर टीपी में किसी भी प्रकार के षुद्धिकरण की व्यवस्था नहीं है जबकि जीएसटी के अन्तर्गत यदि ई-वे बिल गलत बन जाता है तो उसमें सुधार किया जा सकता है।

यूसीसीआई का यह सुझाव है कि टीपी में भूल सुधार करने की सुविधा प्रदान की जावे।

(3) गोपनीय व्यावसायिक जानकारी का सार्वजनिक किया जाना:

टीपी व्यवस्था के अन्तर्गत माल खरीदने वाले का नाम टीपी पर सार्वजनिक हो जाता है तथा खान एवं भू-विज्ञान विभाग की वेबसाईट पर भी प्रदर्षित होता है। इससे व्यवसायी किसे माल बेच रहा है इसकी जानकारी अन्य प्रतिस्पर्धी व्यापारियों को भी प्राप्त हो जाती है। इससे विक्रेता व्यापारी को व्यावसायिक हानि उठानी पड रही है।

यूसीसीआई का यह सुझाव है कि टीपी पर खरीददार पार्टी का नाम और पता दर्षाया जाता है उसे पूर्व की भांति सार्वजनिक नहीं किया जाए।

(4) एक से अधिक व्यापारियों को एक ही ट्रक में पार्ट लोड में माल भेजने पर अलग-अलग टी.पी. का नहीं निकलना:-

एक से अधिक व्यापारियों को एक ही ट्रक व एक ही समय में पार्ट लोड में माल भेजने पर अलग-अलग टी.पी. नहीं निकलती क्योंकि खाली ट्रक का वजन बदलने की व्यवस्था नहीं है।
उपरोक्त सन्दर्भ में यूसीसीआई का यह सुझाव हैं कि माईनिंग विभाग द्वारा वेस्ट मार्बल क्रेजी एवं वेस्ट मार्बल पाउडर को टीपी सिस्टम में इनपुट लेने की व्यवस्था प्रदान की जावे। जब तक यह व्यवस्था सभी लोगों के लिए लागू नहीं हो जाती है तब तक टीपी व्यवस्था को मिनरल पाउडर से स्थगित (क्मििमतमक) किया जावे।

ज्ञात हो कि मिनरल प्रोसेसिंग यूनिट्स वेस्ट मार्बल पाउडर को उपयोग में लेकर एक प्रकार से पर्यावरण के संरक्षण के कार्य में सहयोग प्रदान कर रहे हैं। ऐसा नहीं किए जाने पर वेस्ट मार्बल पाउडर का अम्बार लग जाएगा।

मिनरल प्रोसेसिंग उद्योग द्वारा राश्ट्र के बहुमूल्य खनिज के एक-एक कण का अधिकतम उपयोग किया जा रहा है।

यूसीसीआई की माईनिंग सब कमेटी के चेयरमैन पूर्वाध्यक्ष श्री एम.एल लूणावत ने बताया कि ट्रांजिट पास व्यवस्था में कई प्रकार की त्रुटियों से पूरा माईनिंग एवं मिनरल प्रोसेसिंग उद्योग परेषान है तथा इस सम्बन्ध में कई बार खान एवं भू-विज्ञान निदेषक को लिखा गया है।

हमें यह आषा है कि विभाग इन समस्याओं का जल्द समाधान निकाल कर उद्योगों को राहत प्रदान करेगा।

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