हिंदुस्तान जिंक ने शुरू किया “कोई बच्चा रहे न भूखा” अभियान.


—उदयपुर, चित्तौड़, भीलवाड़ा व अजमेर में चलेगा
—अभियान का का मकसद : बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार

करना और वंचित बच्चों को पौष्टिक भोजन प्रदान करना है
राजसमन्द । हिंदुस्तान जिंक लि (HZL) ने राज्य सरकार के समेकिल बाल विकास सेवाओं (ICDS) के सहयोग से “कोई बच्चा रहे ना भूखा” अभियान शुरू किया है।

 यह परियोजना राज्य में उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा व अजमेर में शुरू की गई है। इसका मकसद 0 से 6 वर्ष के बच्चों में कुपोषण की श्रृंखला को तोड़ना और बाल मृत्यु दर को रोकना है।

इस अभियान के माध्यम से कोविड—19 के बाद गंभीर रूप से प्रभावित बच्चों, स्तनपान कराने वाली महिलाओं व उनके परिवारों को अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करना है। इन सभी जिलों की 3089 से अधिक आंगनवाड़ियों को जोड़ा गया है।  

गौरतलब है कि कोरोना महामारी ने कमजोर समुदाय के लोग भोजन और राशन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसने स्तनपान कराने वाली माताओं, नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों को सबसे अधिक प्रभावित किया है। अब तक हिंदुस्तान जिंक लि के इस कार्यक्रम ने 17,000 से अधिक गंभीर व अति गंभीर कुपोषित (एसएएम) बच्चों के जीवन को छुआ है।

खुशी अभियान से जुड़े वी जयारमन ने बतमाया कि स्वयंसेवकों व आंगनवाड़ी और आशा टीम के समर्थन से 2,372 बच्चों के लिए सूखे राशन और टेक-होम राशन (टीएचआर) की आपूर्ति की गई है। इस अभियान में 263 ख़ुशी कार्यकर्ताओं ने स्वेच्छा से सहायता करने का निर्णय किया है।

इन जिलों में 9500 कमजोर परिवार को सूखा राशन के किट भी दिए गए हैं। इसके अलावा कंपनी के भागीदारों व 300 से अधिक दानदाताओं की मदद से 2500 से अधिक परिवारों को राशन किट बांटे गए हैं।

यह परियोजना ग्रामीण स्वयंसेवी विकास संस्थान (अजमेर), केअर इंडिया (भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़), जाटान संस्थान (राजसमंद) और सेवा मंदिर (उदयपुर) जैसे प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संगठनों की साझेदारी में क्रियान्वित की जा रही है।
हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के बारे में
हिंदुस्तान जिंक, एक वेदांत समूह की कंपनी, दुनिया की सबसे बड़ी और जिंक-लीड और सिल्वर की भारत की एकमात्र उत्पादक है। कंपनी का मुख्यालय राजस्थान के उदयपुर में है जहाँ इसकी जिंक-लीड खदानें और गलाने वाले संयंत्र लगे है।

हिंदुस्तान जिंक कैप्टिव थर्मल पावर प्लांट के साथ आत्मनिर्भर है और पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना कर हरित ऊर्जा का उत्पादन किया है।

खनन और धातु कंपनियों के बीच 2019 में कंपनी को एशिया-पैसिफिक में पहला और वैश्विक स्तर पर डॉव जोन्स सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स में 5 वां स्थान मिला है। हिंदुस्तान जिंक एक प्रमाणित वॉटर पॉजिटिव कंपनी है।

सामाजिक रूप से जिम्मेदार कॉरपोरेट के रूप में, हिंदुस्तान जिंक अपने व्यावसायिक स्थानों के पास रहने वाले ग्रामीण और आदिवासी लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है।

कंपनी भारत में शीर्ष 15 सीएसआर स्पेंडर्स में से एक है और वर्तमान में राजस्थान के 184 कोर गांवों और उत्तराखंड में 5,000 लोगों तक कुल 500,000 लोगों तक पहुंच रही है।

एक मार्केट लीडर के रूप में, हिंदुस्तान जिंक जिंक बाजार के 79% और भारत में बढ़ते सिल्वर मार्केट का 95% हिस्सा संचालित करता है।

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