बेटे के जन्मदिन को भूल ग्रामीणों कि मदद के लिए पहुंची ये महिला सरपंच.

ऐसे तो आपने सुना ही होगा कि कुछ लोगों के लिए कर्म ही जीवन हैं, ऐसी ही एक मामला रविवार को सामने आया जब उदयपुर के पुरिया खेड़ी गांव कि बालाथल पंचायत कि सरपंच ने अपने परिवार से ज्यादा अपने कर्तिव्य को महत्व देते हुए इंसानियत कि एक नई मिसाल कायम कि । 

मौका था सरपंच मेहजबीन सिंधी के 11 वर्षीय बेटे अशरफ के 11वे जन्मदिन का, घर के सभी लोग अशरफ को मुबारक बात देने में लगे थे तभी अचानक उनको टेलीफोन के द्वारा जानकारी मिली कि उदयपुर से लगभग 40 किलोमीटर दूर बालाथल पंचायत के पुरिया खेड़ी गांव में तेंदुए ने हमला कर एक गाय को मार डाला  हैं जिसका शव खेत में पड़ी मिली हैं। 

सुचना मिलते ही महिला सरपंच ने पूर्व उपसरपंच और आपने पति मुबिन सिंधी को इस घटना कि जानकारी दि, जिसपर अपने बिटवीन अशफ़ाक़ के जन्मदिन कि तैयारियों को ऐसे ही छोड़ दोनों ने घटना स्थल पर पहुँच कर ग्रामीणों कि मदद करने का निर्णेय लिया। 

फिर क्या था अपनी छोटी बेटी को साथ लेकर दोनों निकल पड़े घटना स्थल कि ओर, गांव पहुँचते ही ग्रामीणों से मुलाक़ात कि घटना का जायजा लिया और स्थानीय फारेस्ट अधिकारीयों से संपर्क कर उन्हें घटना स्थल कि सारी जानकारी दि जिसपर अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और तेंदुवे कि तलाश शुरू कि, दंपत्ति ने अधिकारीयों से मौके पर तेंदुवे को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने कि मांग कि और घंटो कि प्रयासों के बाद आखिरकार विभाग के अधिकारीयों द्वारा मौके पर पिंजरा लगाया गया। 
गौरतलब हैं कि अपने बेटे के जन्मदिन को नज़रअंदाज कर  महिला सरपंच सरपंच ने अपने कर्तव्य को और उन ग्रामीणों को ज्यादा मेहतव दिया जिन्होंने उसमे अपना विश्वास दिखाकर उन्हें इस पद पर बिठाया और इसी के साथ यह साबित कर दिया कि ये सभी ग्रामीण भी उनके परिवार के सदस्यों कि ही तरह हैं, और इस पुरे घटनाकर्म में उनके पति मुबीन ने उनका पूरा सहयोग किया। 

मुबीना से मिली जानकारी के अनुसार पिंजरा अब भी घटनास्थल पर लगा हुआ हैं और विभाग कि टीम द्वारा तेंदुवे को पकड़ने के प्रयास जारी हैं। 

मुबीन ने बताया कि 17 जून कि रात को ग्रामीणों ने तेंदुए के पैर के निशान देखे थे और उसी रात को गांव के महेन्द्र सिंह ने कथित रूप से जानवर को देखा भी था।

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