देश के समक्ष मौजूद चुनौतियां एवं समाधान विषयक व्याख्यान.

हमारा देश नाज़ुक दौर से गुजर रहा है। हमारे संविधान का मूल आधार धर्मनिपेक्षता एवं समानता है। भारत जैसा विविध संस्कृति, भाषा भूषा, ,धर्मो वाला देश बिना धार्मिक स्वतंत्रता के नहीं चल सकता। उक्त विचार हिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश राजिंदर सिंह सच्चर ने पीयूसीएल एवं डॉ मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट के सयुंक तत्वावधान में आयोजित देश के समक्ष मौजूद चुनौतियां एवं समाधान विषयक व्याख्यान में व्यक्त किये।

DSCN1514

न्यायमूर्ति सच्चर ने कहा कि देश के हर इंसान को समझना चाहिए कि इंसान मरता है कोई हिन्दू या मुस्लिम नहीं। मध्यम ,उच्च व बुद्धिजीवी वर्ग की नैतिक जिम्मेदारी है कि गरीबो के साथ नाइंसाफी नहीं हो। सच्चर ने कहा कि  बहु संख्यक होने के नाते हिन्दुओ को अल्पसंख्यको के विकास में महती भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने बताया कि सच्चर कमिटी की रिपोर्ट मुस्लिम ,अल्पसंख्यको की ही नहीं वरन हिन्दुओ की दशा भी दर्शाती है।

प्रशोत्तर करते हुए जस्टिस सच्चर ने कहा की हम नागरिको को देश की बेहतरी के लिए आगे आना होगा। नागरिक को ये सोचना होगा की देश के लिए मै क्या योगदान कर सकता हु बजाये देश मेरे लिए क्या कर रहा है। न्याय व्यवस्था पर पूछे गए सवाल के जवाब में सच्चर ने कहा कि न्यायाधीश भगवन नहीं है एक आम व्यक्ति है हा उसके पास ताकत है पर साथ ही हमारे देश में संवेधानिक व्यवस्थाये भी है। डॉ अरुण ज़खारिया ,एडवोकेट अरुण व्यास ,कवि अशोक मंथन,बोहरा युथ के मंजूर हुसैन,एडवोकेट प्रवीण,संयम लोढ़ा ,भरत कुमावत,मनियर नंदवाना ,कामरेड मेघराज तावड़ सहित गणमान्य बुद्धिजीवियों के सवालो के जवाब न्यायमूर्ति सच्चर ने दिए।

पीयूसीएल की अध्यक्ष ज़ैनब बानू ने स्वागत करते हुए मौजूदा दौर की चुनोतियो का ज़िक्र किया। वरिष्ठ अधिवक्ता  रमेश नंदवाना ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। डॉ मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय एस  मेहता ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए साम्प्रदायिक सदभाव के  ताने बाने को बनाये रखने की अपील की। व्याख्यान का संयोजन ट्रस्ट सचिव नन्द किशोर शर्मा ने किया।

Related

JOIN THE DISCUSSION

three × 4 =