’गांधी मूल्य आधारित शांति षिक्षा’ विषयक कार्यषाला स्व की पहचान एवं भीतरी शक्ति से ही विष्व शांति चैन्नई के कुलन्दाई सामी ने कराये व्यावहारिक प्रयोग

आज ऐसी षिक्षा की जरूरत है जो पुनः प्रकृति की ओर ले जाए। प्रकृति मूलक जीवन शैली ही शांति और वास्तविक समृद्धि का आधार है। यह विचार चैन्नई गांधी शांति प्रतिष्ठान के प्रमुख कुलन्दाई सामी ने विद्याभवन गांधी षिक्षा अध्ययन संस्थान में आयोजित ’गांधी मूल्य आधारित शांति षिक्षा’ विषयक कार्यषाला में व्यक्त किये।

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कुलन्दाई सामी ने कहा कि मौजूदा विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए एक बडे सामाजिक परिवर्तन की जरूरत है। अतः विद्यार्थी अपने स्व को पहचानें। उन्होनें कहा कि आतंरिक शक्ति से ही शांति का आगाज होता है। षिक्षा में उन विधियों का समावेष जरूरी है, जो स्व की पहचान कराये व आतंरिक शक्ति को जागृत कर सके। कुलन्दाई सामी ने कार्यषाला में ऐसी विभिन्न विधियों का प्रयोग करवाया।
प्रमुख गांधीवादी रियाज तहसीन ने कहा कि गांधी के ग्यारह व्रतों के पालन तथा सात सामाजिक पापों के निषेध से ही वर्तमान हिंसा, टकराहट एवं द्वंद्वो का निवारण हो सकेगा। सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य,श्षरीरश्रम, अस्वाद, सर्वधर्म समभाव, समानता, स्वदेषी, विनम्रता ग्यारह व्रत हैं तथा सिद्धांत विहिन राजनीति ,कार्य बिना संपति ,नैतिकता विहिन व्यापार ,चरित्र बिना षिक्षा संज्ञान विहिन आनंद ,नैतिकता विहिन विज्ञान ,त्याग विहिन पूजा सामाजिक पाप है।

विद्या भवन सोसायटी अध्यक्ष अजय मेहता ने ऐसी षिक्षा की आवष्यकता बताई जो विद्यार्थियों में समालोचनात्मक सोच का विकास करती हो।
समाजविद चंद्रा भंडारी ने कहा कि षिक्षा का उद्देष्य जिम्मेदार नागरिक बनाना है। उन्होंने कहा कि दूसरों की तुलना एवं मूल्यांकन की अपेक्षा स्वयं का सतत् आंकलन करना चाहिए।

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षिक्षाविद् ए.बी.पाठक ने गाँधी की षिक्षा पद्धति को वर्तमान समस्याओं का हल सुझाने में सहायक बताया।
कार्यषाला संयोजिका श्रीमती कुमुद पुरोहित सहित संस्थान के विद्यार्थियों व संकाय सदस्यों ने मेेेवाड के प्रमुख गाँधीवादी कार्यकर्ताओं का जीवन परिचय दिया तथा उनके योगदान को रेखांकित किया।
प्राचार्या डाँ सुगन शर्मा ने कार्यषाला के उद्देष्यों से अवगत कराया। इस अवसर पर महाविद्यालय पत्रिका अनुबंध का विमोचन किया गया। संचालन श्रीमती अरूणा माथुर ने किया तथा धन्यवाद डाँ अषोक श्रीवास्तव ने दिया।

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